नीतीश कुमार का UP सफर!

नीतीश कुमार का UP सफर!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले महीने एनडीए से नाता तोड़ महागठबंधन के साथ बिहार में नई सरकार का गठन किया। महागठबंधन के साथ आते हैं नीतीश कुमार एक्शन में दिखे और विपक्ष को एक करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आए चाहे तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर का बिहार का दौरा करना हो या नीतीश कुमार का दिल्ली में तीन दिवसीय का दौरा। विपक्षी पार्टी के तमाम बड़े नेताओं से मुलाकात करना और विपक्ष को एकजुटता की कवायद तेज करना। इससे समझा जा सकता है कि नीतीश कुमार विपक्ष को एकजुट करने मे अभी से ही 2024 लोकसभा का चुनाव के लिए एक्टिव मोड में आ चुके हैं।

हाल ही में जेडीयू के द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर तथा फूलपुर लोकसभा सीट से नीतीश कुमार के चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई है। जदयू की ओर से कहा जा रहा है कि इन दोनों सीट पर लोकसभा चुनाव में लड़ने का निमंत्रण मिल रहा है। हालाकी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह द्वारा बयान में यह कहा गया कि अभी लोकसभा चुनाव में काफी समय बाकी है आने वाले समय में तय होगा कि नीतीश कुमार कहां से चुनाव लड़ते हैं या नहीं।

केंद्र की सत्ता में पहुंचने के लिए उत्तर प्रदेश के रास्ते से ही गुजरना पड़ता है क्योंकि उत्तर प्रदेश भारत के उन राज्यों में शुमार है जो लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ी सीट मानी जाती है 543 लोकसभा सीट में से 80 सीट उत्तर प्रदेश में ही आते हैं। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश राज्य काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे टक्कर देना चाहते हैं नीतीश कुमार? जी हां जिस सीट पर नीतीश कुमार के चुनाव लड़ने की संभावनाएं बताई जा रही है वह पूर्वांचल क्षेत्र में आता है तथा बनारस लोकसभा सीट के आसपास है। इस लिहाज से नीतीश कुमार द्वारा यहां से चुनाव लड़ना तथा देश को सीधे संदेश दिया जा सकता हैं। नीतीश कुमार एक बड़ा दांव खेल सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में जदयू को अपने राजनीतिक विस्तार की संभावनाएं दिख रही है। उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरण में जदयू को अपने अनुकूल दिख रहा है। बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में तथा अन्य जिलों में कुर्मी की आबादी, यादवों के लगभग बराबर है। नीतिश कुमार द्वारा विपक्ष को एक करने की कवायद के जरिए अपने पार्टी का भी विस्तार कर सकते हैं। इस लिहाज से यहां से चुनाव लड़ना नीतीश कुमार तथा उनके पार्टी के लिए अनुकूल है।

कई राजनीति जानकर के माने तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मॉडल के तहत दो लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। एक उत्तर प्रदेश की सीट दूसरी बिहार के नालंदा सीट से भी वह चुनाव में दो-दो हाथ करते हुए नजर आ सकते हैं। ऐसी खबरों के बाद बीजेपी की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है क्योंकि नीतीश कुमार की छवि साफ-सुथरी मानी जाती है तथा परिवारवाद का भी आरोप से कोसों दूर हैं। वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार कुर्मी समुदाय से आते हैं और कुर्मियो की सियासी आधार पूर्वांचल के इलाकों में अच्छी खासी है, उत्तर प्रदेश में कुर्मी समुदाय बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है ऐसे में नीतीश कुमार का यह प्लान बीजेपी की चिंता बढ़ा सकता है।

बीजेपी भी एक्टिव मोड में नजर आ रही है और वह लगातार नीतीश कुमार तथा जदयू को निशाने पर ले रही है। हाल ही में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने भी नीतीश कुमार को खुली चुनौती दी है कि नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर तथा फूलपुर सीटों से चुनाव लड़ते हैं तो उनकी जमानत भी जप्त हो जाएगी।

लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएगा देश तथा बिहार के राजनीति में जुवानी वार और तेजी से शुरू हो जाएगा। अब देखना यह है कि नीतीश कुमार क्या उत्तर प्रदेश की किसी सीटों से चुनाव लड़ते हैं या बिहार में ही दो दो हाथ बीजेपी से करेंगे।

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